अवैध पटाखा कारोबार: घनी आबादी के बीच मौत का सामान, कुशीनगर विस्फोट में चार मरे, चौकी प्रभारी समेत चार सस्पेंड


पत्रिका न्यूज नेटवर्क

लखनऊ/कुशीनगर. दिवाली आते ही अवैध पटाखा कारोबार में तेजी आ गई है। रिहायशी इलाकों और घनी बस्तियों में इसके भंडारण ने भी जोर पकड़ लिया है। एनजीटी और कोर्ट की सख्ती के बावजूद पटाखा कारोबारी बेलगाम हैं। कार्रवाई और इनके खिलाफ अभियान के दावाेे के बीच जमीनी हकीकत कुछ और ही है। रिहायशी इलाकों में पटाखे के अवैध भंडारण मौत का सामन साबित हो रहे हैं। कुशीनगर जिले में ऐसे ही अवैध पटाखा गोदाम में बुधवार की सुबह भीषण विस्फोट के बाद भंडारण करने वाले समेत परिवार के चार लोगों की मौत हो गई जबकि 12 लोग गंभीर रूप से झुलस गए, जिनमें से 4 की हालत नाजुक बतायी जा रही है। घटना के बाद एक उपनिरीक्षक रितेश सिंह, बीट हेड कांसटेबल मानिक चंद, कांसटेबल संतोष कुमार व कांस्टेबल मनीष प्रसाद को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। इसके पहले बीते सितम्बर महीने में बलरामपुर में भी अवैध पटाखा भंडारण में विस्फोट से एक व्यक्ति की जान जा चुकी है, जबकि पांच लोग घायल हुए थे।

 

कुशीनगर में जिंदा जले चार लोग

कुशीनगर के कप्तानगंज कस्बे के वार्ड नंबर 11 में जावेद नाम के व्यक्ति ने घनी बस्ती में अवैध पटाखा गोदाम बना रखा था। बुधवार की सुबह अचानक उसमें विस्फोट हो गया, जिसके बाद जावेद और उसके परिवार को घर से निकलने तक का मौका नहीं मिला। जावेद, उसकी पत्नी अनवरी, पुत्री नाजिया और मां फातिमा जिंदा जल गए, जबकि आजाद, रामसजन, नेहा, प्रियंका, चंदन, शाहीन, शमा, चांदनी व अफसाना सहित आस-पड़ोस के 12 लोग गंभीर रूप से झुलस गए। उनमें से चार की हालत बेहद नाजुक बतायी जा रही है। भीषण विस्फोट से पूरा कस्बा दहल गया। अगल-बगल के मकान भी जद में आ गए। फायर ब्रिगेड पहुंची तो गली के चलते काफी परेशानी हुई। विकराल हुई आग में रहरहकर विस्फोट हो रहा था। किसी तरह से तीन घंटे बाद जाकर आग पर काबू पाया जा सका। एसपी और एडिशनल एसपी ने खुद मौके पर पहुंचकर जायजा लिया।

 

सुप्रीम कोर्ट की सख्ती बेअसर

पटाखा कारोबार और इसके अवैध भंडारण को लेकर सुप्रीम कोर्ट की सख्त गाइडलाइन है, बावजूद इसके न तो कारोबार पर लगाम लग पा रही है और न ही प्रशासन इसके प्रति गंभीर दिख रहा है। दिवाली आते ही फिर यूपी के सिर्फ बड़े ही नहीं बल्कि छोटे-छोटे शहरों में भी घनी आबादी के बीच बिना लाइसेंस पटाखा कारोबार तेजी से फल-फूल रहा है। कड़ी कार्रवाई के अभाव में उनके खिलाफ अभियानों का भी कोई खास असर नहीं। सुतली बम जैसे कई पटाखे तो वैध से ज्यादा अवैध रूप से बनाए जाते हैं, क्योंकि इनपर फैक्ट्री का नाम तक नहीं होता। कम खर्च में अधिक मुनाफे के चक्कर में अवैध पटाखा कारोबारी लोगों की जान से खिलवाड़ करने से भी नहीं चूकते। मेरठ में तो पुलिस ने एक घर में छापेमारी की तो वहां छत पर देशी बमों का जखीरा सुखाया जा रहा था। बाकायदा मजदूर लगाकर अवैध रूप से पटाखे बनाए जा रहे थे। लाखों रुपये के पटाखे बरामद कर पुलिस ने मुख्य आरोपी आरिफ के छोटे भाई रिजवान समेत छह महिलाओं को गिरफ्तार किया। सरधना में भी तीन क्विंटल पटाखे पकड़े गए और चार लोग अरेस्ट हुए।

 

यूपी समेत चार राज्यों को एनजीटी का नोटिस

प्रदूषण को देखते हुए इस बार एनजीटी सख्त हो गया है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने केन्द्रीय पर्यावरण एवं मंत्रालय के साथ ही यूपी समेत चार राज्यों की सरकारों पर इस बार पटाखों पर रोक लगाने का अनुरोध किया है। आशंका है कि इस बार कोरोना महामारी के बीच प्रदूषण खतरनाक हो सकता है। एनजीटी ने पर्यवारण एवं वन मंत्रालय, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, उत्तर प्रदेश के साथ-साथ दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण कमेटी, दिल्ली पुलिस आयुक्त, हरियाणा और राजस्थान की सरकारों से 30 नवंबर तक पटाखों पर प्रतिबंध लगाने की अपील करते हुए इस मसले पर उनका जवाब मांगा है।

 

भदोही में पिछले साल मरे थे 12 लोग

2019 में भदोही जिले के चौरी में एक कालीन कारखाने में बने अवैध पटाखा गोदाम में विस्फोट हुआ था, जिसमें पश्चिम बंगाल के 12 कालीन बुनकर मजदूरों की मौत हो गई थी। इस घटना में पूरा मकान ही विस्फोट से उड़ गया था। कालीन कारोबारी ही अवैध पटाखा कारोबार करता था गोदाम में पटाखा बनाने के सामान में आग लगने से घटना हुई थी।














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