आईएमए का दावा: पतंजलि ने मछली पर किया कोरोनिल का परीक्षण, वो भी ठीक से नहीं हुआ


न्यूज डेस्क
Published by: अलका त्यागी
Updated Wed, 02 Jun 2021 12:30 AM IST

सार

बाबा रामदेव के एलोपैथ को लेकर दिए गए बयान के बाद अब आईएमए ने भी पतंलजि की कोरोनिल पर हमला बोला है।

कोरोनिल
– फोटो : उत्तराखंड खबर फाइल फोटो

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पतंजलि ने कोरोनिल का परीक्षण उत्तराखंड की नदियों में पाई जाने वाली जेब्रा फिश (मछली की एक प्रजाति) पर किया है। आईएमए उत्तराखंड के सचिव डॉ. अजय खन्ना ने यह दावा किया है। उन्होंने कहा कि खुद पतंजलि ने पाइथोमेडिसिन जर्नल में छपे शोधपत्र में इस बात की जानकारी दी है। 

उन्होंने कहा कि नियमानुसार मछली पर परीक्षण की गई दवा, मनुष्यों पर इस्तेमाल नहीं की जा सकती। कहा कि मछली पर भी ठीक ढंग से परीक्षण नहीं किया गया। मछली को कोरोना संक्रमित करने के बाद कोरोनिल दी जानी चाहिए थी। ताकि, पता चले कि उसका वायरस पर कुछ असर हो रहा है या नहीं, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।

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जर्नल में छपे शोधपत्र में उन्होंने मछली को स्पाइक प्रोटीन देने की बात लिखी है। डा. खन्ना ने कहा कि यह शोध पूरी तरह गलत है। ऐसे में इसके आधार पर पतंजलि और बाबा रामदेव का कोरोनिल को लेकर कोई भी दावा करना गलत है। 

उन्होंने कहा कि दवाओं के परीक्षण की एक मानक प्रक्रिया है। जब उस प्रक्रिया का पालन परीक्षण में किया ही नहीं गया तो कोई भी इस नतीजे पर कैसे पहुंच सकता है कि दवा प्रभावी है।

एलोपैथी चिकित्सा पद्धति को लेकर दिए गए योगगुरु बाबा रामदेव के बयान को लेकर देशभर के डॉक्टरों में आक्रोश है। इसके विरोध में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन, प्रांतीय चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवा संघ और रेजिडेंट डॉक्टर एसोसिएशन से जुड़े डॉक्टरों ने मंगलवार को काला दिवस मनाया। इस दौरान डॉक्टरों ने बांह पर काली पट्टी बांधकर विरोध दर्ज कराया। 

आईएमए के अध्यक्ष डॉ. अमित सिंह व सचिव डॉ. रूपा हंसपाल की अगुवाई में राजधानी के तमाम डॉक्टरों ने काली पट्टी बांधकर काम किया। डॉॅ. अमित सिंह ने कहा कि बाबा रामदेव ने एलोपैथी चिकित्सा पद्धति के साथ ही डॉक्टरों को लेकर जो बयानबाजी की है उसकी जितनी भी निंदा की जाए कम है। बाबा रामदेव को न सिर्फ माफी मांगनी चाहिए, वरन उन्हें अपना बयान वापस भी लेना चाहिए। उन्होंने बताया कि आईएमए की ओर से योगगुरु रामदेव को नोटिस जारी किया गया है। अगर 15 दिन के भीतर वह जवाब नहीं देते हैं तो एसोसिएशन आंदोलन की आगे की रणनीति पर विचार करेगी।

वहीं, पीएमएसएच के सचिव एवं वरिष्ठ ईएनटी सर्जन डॉ. पीयूष त्रिपाठी ने कहा कि बाबा रामदेव को योग और आयुर्वेद तक ही सीमित रहना चाहिए। उन्हें एलोपैथी चिकित्सा पद्धति को लेकर बयानबाजी करने का कोई हक नहीं है। इस तरह की बयानबाजी उनकी छोटी सोच को दर्शाता है। डॉ. त्रिपाठी के मुताबिक एलोपैथी चिकित्सा पद्धति के जरिए ही दुनिया में जितनी भी महामारी आईं, उनसे करोड़ों लोगों की जिंदगी को बचाया जा सका।

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन और प्रांतीय चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवा संघ के साथ ही रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन की ओर से भी काला दिवस मनाया गया। इस दौरान दून अस्पताल, कोरोनेशन अस्पताल और गांधी शताब्दी अस्पताल में तैनात रेजीडेंट डॉक्टरों ने काली पट्टी बांधकर विरोध दर्ज कराया।

विस्तार

पतंजलि ने कोरोनिल का परीक्षण उत्तराखंड की नदियों में पाई जाने वाली जेब्रा फिश (मछली की एक प्रजाति) पर किया है। आईएमए उत्तराखंड के सचिव डॉ. अजय खन्ना ने यह दावा किया है। उन्होंने कहा कि खुद पतंजलि ने पाइथोमेडिसिन जर्नल में छपे शोधपत्र में इस बात की जानकारी दी है। 

उन्होंने कहा कि नियमानुसार मछली पर परीक्षण की गई दवा, मनुष्यों पर इस्तेमाल नहीं की जा सकती। कहा कि मछली पर भी ठीक ढंग से परीक्षण नहीं किया गया। मछली को कोरोना संक्रमित करने के बाद कोरोनिल दी जानी चाहिए थी। ताकि, पता चले कि उसका वायरस पर कुछ असर हो रहा है या नहीं, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।

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जर्नल में छपे शोधपत्र में उन्होंने मछली को स्पाइक प्रोटीन देने की बात लिखी है। डा. खन्ना ने कहा कि यह शोध पूरी तरह गलत है। ऐसे में इसके आधार पर पतंजलि और बाबा रामदेव का कोरोनिल को लेकर कोई भी दावा करना गलत है। 

उन्होंने कहा कि दवाओं के परीक्षण की एक मानक प्रक्रिया है। जब उस प्रक्रिया का पालन परीक्षण में किया ही नहीं गया तो कोई भी इस नतीजे पर कैसे पहुंच सकता है कि दवा प्रभावी है।


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