उत्तराखंड: हाईकोर्ट के 68 साल पुराने नियमों में बदलाव पर हाईकोर्ट में चल रहा विचार 


न्यूज डेस्क, उत्तराखंड खबर, नैनीताल

Updated Thu, 05 Nov 2020 11:52 PM IST



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नैनीताल हाईकोर्ट के 68 वर्ष पुराने नियमों में बदलाव करने की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका को निस्तारित करते हुए कोर्ट ने कहा है कि हाईकोर्ट में पहले से ही इन मांगों पर विचार किया जा रहा है।  जल्द उनकी मांगों पर कार्यवाही नहीं होती है तो वे फिर से याचिका दायर करने को स्वतंत्र होंगे। 

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एवं न्यायमूर्ति रवींद्र मैठाणी की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। दिल्ली निवासी अजय गौतम ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि उत्तराखंड हाईकोर्ट में इलाहाबाद हाईकोर्ट के वर्ष 1952 के नियमों का पालन किया जा रहा है। याचिका में कहा कि सबसे अधिक महत्व हाईकोर्ट के रजिस्ट्री कार्यालय से संबंधित नियमों को दिया गया है।

याचिका में कहा कि कई वादियों व प्रतिवादियों को उनके मुकदमे कोर्ट में लगने की सूचना या तो अगली शाम को मिलती है या फिर मिलती ही नहीं है। इसके चलते जो लोग अपने मुकदमे अधिवक्ता के बजाय स्वयं लड़ते हैं या उनके अधिवक्ता बाहर से आते हैं तो उन्हें असुविधा का सामना करना पड़ता है। क्योंकि अगली शाम केस लगने की सूचना मिलने के बाद केस की तैयारी करना व मुकदमे की पैरवी के लिए नैनीताल पहुंचना असंभव हो जाता है। 

याचिका में कहा कि इन पुराने नियमों से न्याय मिलने में भी देरी हो रही है। याचिका में हाईकोर्ट के वर्षों पुरानी नियमों में बदलाव कर वादियों प्रतिवादियों को उनके मुकदमे की तिथि एसएमएस या ईमेल के माध्यम से देने, रजिस्ट्री कार्यालय के पुराने नियमों में बदलाव कर उनका आधुनिकीकरण करने और डिजिटल माध्यम का उपयोग करने की मांग की गई थी। पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने जनहित याचिका को निस्तारित कर दिया।

सार

  • मामले मे दायर दिल्ली निवासी व्यक्ति की याचिका हाईकोर्ट ने की निस्तारित
  • याचिकाकर्ता का कहना, पुराने नियमों के चलते न्याय मिलने में हो रही देरी  

विस्तार

नैनीताल हाईकोर्ट के 68 वर्ष पुराने नियमों में बदलाव करने की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका को निस्तारित करते हुए कोर्ट ने कहा है कि हाईकोर्ट में पहले से ही इन मांगों पर विचार किया जा रहा है।  जल्द उनकी मांगों पर कार्यवाही नहीं होती है तो वे फिर से याचिका दायर करने को स्वतंत्र होंगे। 

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एवं न्यायमूर्ति रवींद्र मैठाणी की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। दिल्ली निवासी अजय गौतम ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि उत्तराखंड हाईकोर्ट में इलाहाबाद हाईकोर्ट के वर्ष 1952 के नियमों का पालन किया जा रहा है। याचिका में कहा कि सबसे अधिक महत्व हाईकोर्ट के रजिस्ट्री कार्यालय से संबंधित नियमों को दिया गया है।

याचिका में कहा कि कई वादियों व प्रतिवादियों को उनके मुकदमे कोर्ट में लगने की सूचना या तो अगली शाम को मिलती है या फिर मिलती ही नहीं है। इसके चलते जो लोग अपने मुकदमे अधिवक्ता के बजाय स्वयं लड़ते हैं या उनके अधिवक्ता बाहर से आते हैं तो उन्हें असुविधा का सामना करना पड़ता है। क्योंकि अगली शाम केस लगने की सूचना मिलने के बाद केस की तैयारी करना व मुकदमे की पैरवी के लिए नैनीताल पहुंचना असंभव हो जाता है। 

याचिका में कहा कि इन पुराने नियमों से न्याय मिलने में भी देरी हो रही है। याचिका में हाईकोर्ट के वर्षों पुरानी नियमों में बदलाव कर वादियों प्रतिवादियों को उनके मुकदमे की तिथि एसएमएस या ईमेल के माध्यम से देने, रजिस्ट्री कार्यालय के पुराने नियमों में बदलाव कर उनका आधुनिकीकरण करने और डिजिटल माध्यम का उपयोग करने की मांग की गई थी। पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने जनहित याचिका को निस्तारित कर दिया।

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