कोरोना संक्रमण ने थामा इलेक्ट्रिक बसों का परिचालन


बेंगलूरु. महानगर में कोरोना संक्रमण के चलते शहर की अति महत्वाकांक्षी परियोजना इलेक्ट्रिक बसों के लिए शहर को थोड़ा इंतजार करना पड़ सकता है। फरवरी माह में बीएमटीसी ने एनटीपीसी व जेबीएम नामक संयुक्त उद्यम को कार्य आदेश जारी किया था जिसके अंतर्गत बेंगलूरु स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत ९० गैर वातानुकूलित इलेक्ट्रिक बसों की आपूर्ति होनी थी। इन बसों का परिचालन जून माह से चरणबध्द तरीके से किया जाना थ।

बीएमटीसी के सूत्रों के अनुसार एनटीपीसी व जेबीएम जून में बसों की आपूर्ति नहीं कर पाएंगे। ऐसे मेंं आपूर्ति की समय सीमा बढ़ाया जाना तय है। सूूत्र बताते हैं कि कोरोना संक्रमण के कारण इसकी समय सीमा अगस्त,२०२१ तक बढ़ाई जा सकती है।
दोनों कम्पनियों में कार्यरत सूत्रों के अनुसार इसकी समय सीमा बढऩा लाजिमी है। एनटीपीसी व जेबीएम के कई मजदूर कोरोना संक्रमण की चपेट में आ गए थे। इसकी वजह से उत्पादन में कमी आई और बसों की आपूर्ति टल गई।

पहला सार्वजनिक परिवहन निगम

यह एक विडम्बना ही है कि वर्ष 2014 में बीएमटीसी किसी राज्य सरकार द्वारा संचालित पहला सार्वजनिक परिवहन निगम था जिसने इलेक्ट्रिक बसों के परीक्षण परिचालन की अनुमति दी थी। निगम के बोर्ड ने वर्ष २०१६ में १५० बसों के लीज की अनुमति दी थी। हालांकि पांच साल बीत जाने के बाद भी एक भी इलेक्ट्रिक बस सडक़ पर नहीं उतर पाई। यह अलग बात है कि इसी बीच कई राज्यों ने इलेक्ट्रिक बसों का परिचालन शुरू कर दिया है।

इलेक्ट्रिक बसों का परिचालन खर्च कम

केंद्रीय बिजली मंत्रालय के तहत एक सार्वजनिक उपक्रम एनटीपीसी ने 51 रुपए की बोली लगाई है। माना जा रहा है कि अगले साल तक डीजल बसों की तुलना में इलेक्ट्रिक बसों का परिचालन खर्च कम आएगा।

बीएमटीसी की प्रबंध निदेशक सी शिखा के अनुसार कोरोना संक्रमण के कारण 90 इलेक्ट्रिक बसों का परिचालन संभव नहीं हो पाया। हमारा प्रयास है कि कम से कम जुलाई तक पहली बस का परिचालन शुरू हो जाए। बाकी बसें इस साल के अंत तक बीएमटीसी के बेड़े में शामिल हो जाएंगी।

बारह साल का करार
30 से 35 यात्रियों की क्षमता वाली लगभग 90 बसों का परिचालन मुख्य रूप से मेट्रो स्टेशनों से होगा। यह एक 12 वर्ष का करार होगा जिसके तहत बीएमटीसी प्रति किलोमीटर की दर से भुगतान करेगी।

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