जापान के ओसाका शहर में कोरोना के मामले तेजी से बढ़े, ओलंपिक खेलों को रद्द करने की मांग


ओसाका में किंडई विश्वविद्यालय अस्पताल के निदेशक युजी तोहदा ने कहा कि बढ़ते मामलों के कारण लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया नहीं हो पा रही हैं।

ओसाका। जापान के दूसरे सबसे बड़े शहर ओसाका के अस्पतालों में नए कोरोना संक्रमण के मामलों की बाड़ आ गई है। ऐसे में यहां की स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा गई है। लोग बेड और वेंटिलेटर को लेकर परेशान हैं। डॉक्टरों का कहना है कि बीते कई हफ्तों से लगातार वे अपनी ड्यूटी निभा रहे हैं। वे थक चुके हैं। उन्होंने इस गर्मी में ओलंपिक खेलों को टालने की सलाह दी है।

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आधे चिकित्सा कर्मियों का टीकाकरण

डॉक्टरों का कहना है कि जिस गति से कोरोना के मामले बढ़ रहे हैं, उसके अनुपता में स्वास्थ्य व्यवस्थाएं उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में दो महीने बाद होने वाले ओलंपिक खेलोें के लिए कई चुनौतियां हैं। अभी तक यहां केवल आधे चिकित्सा कर्मियों को ही टीकाकरण हुआ है।

ओसाका में किंडई विश्वविद्यालय अस्पताल के निदेशक युजी तोहदा ने कहा कि सीधे शब्दों में कहें तो यह चिकित्सा प्रणाली का पतन है। ब्रिटेन के कोरोना संस्करण और सतर्कता कमी ने संक्रमण की संख्या में विस्फोटक वृद्धि को जन्म दिया है।

एक दिन में 3,849 नए मामले सामने आए

जापान ने अपने आपको अन्य देशों में होने वाले बड़े संक्रमणों की लहर से बचा लिया था। मगर ओसाका प्रान्त में चौथी लहर ने कहर बरपा रखा है। बीते गुरुवार को यहां पर एक दिन में 3,849 नए मामले सामने आए हैं। यह तीन माह पहले की तुलना में पांच गुना अधिक उछाल दर्शाता है।

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14 प्रतिशत को अस्पताल में भर्ती कराया

कोरोना वायरस रोगियों में से सिर्फ 14 प्रतिशत को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। अधिकांश लोगों को अपने घर पर खुद की देखभाल करनी है। ओसाका मेडिकल एंड फार्मास्युटिकल यूनिवर्सिटी अस्पताल के निदेशक डॉ तोशियाकी मिनामी का कहना है कि युवा लोगों में मामले फैल रहे हैं और नए संस्करण उन्हें बहुत जल्दी बीमार कर सकते हैं। गुरुवार तक, गंभीर वायरस के मामलों के लिए ओसाका के 348 अस्पताल के बिस्तरों में से 96 प्रतिशत उपयोग में थे। मिनामी ने कहा कि यह संस्करण युवा लोगों को भी बहुत जल्दी बीमार कर सकता है, और एक बार गंभीर रूप से बीमार होने पर रोगियों को ठीक होने में मुश्किल होती है।

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