पीएम-1 को नजरअंदाज करना है खतरनाक, बिगड़ रही जेनेटिक संरचना


– ठंड की दस्तक के साथ ही बढ़ रहा प्रदूषण का स्तर

– पीएम-10 से लेकर पीएम-2.5 तक के सूक्ष्म कण दिखते हैं, लेकिन पीएम-1 नजर नहीं आते

– पीएम-1 के असर पर सामान्य मास्क भी बेअसर

पत्रिका न्यूज नेटवर्क

लखनऊ. ठंड की दस्तक के साथ ही प्रदूषण का भी स्तर बढ़ने लगा है। प्रदूषण के अति सूक्ष्म कण जेनेटिक संरचना बिगाड़ कर कैंसर के कारक बन रहे हैं। बीते कई महीनों से प्रदूषण का स्तर बढ़ा है। सड़कों पर चलने वाले वाहन इसका प्रमुख कारण हैं। धुएं और उत्पादन प्रक्रिया में डीजल जलाने से पीएम-1 का उत्सर्जन होता है। प्रदूषण के यह तत्व मानव शरीर के लिए घातक होते हैं। यह कोशिकाओं में पहुंचकर उन्हें नुकसान पहुंचाता है। पीएम-10 से लेकर पीएम-2.5 तक के सूक्ष्म कण दिखते हैं, लेकिन पीएम-1 नजर नहीं आते हैं। पीएम-1 व डीजल पर्टिकुलेट मैटर (डीपीएम) अति सूक्ष्म होने की वजह से माइक्रोस्कोप से ही देखे जा सकते हैं।

सामान्य मास्क भी बेअसर

कोरोना वायरस को देखते हुए बाजारों में कई तरह के फैंसी मास्क बेचे जा रहे हैं। बढ़ते प्रदूषण में मास्क पहनने की जरूरत और बढ़ जाती है। लेकिन अब सामान्य मास्क भी पीएम-1 के घातक असर से बचाने में नाकामयाब है। पीएम-1 में सबसे जहरीली सल्फर डाईऑक्साइड गैस होती है। कोयला, पेट्रोलियम व दूसरे ज्वलनशील पदार्थों के जलने से इस गैस का उत्सर्जन होता है। साथ ही कार्बन मोनोऑक्साइड व नाइट्रोजन जैसी गैसों के सूक्ष्म कण भी इनमें शामिल होते हैं। यह मानव शरीर के लिए खतरनाक हो सकता है। हवा में मौजूद जहरीली गैस न सिर्फ आंखों में जलन पैदा करती है बल्कि उन लोगों के लिए घातक है जिन्हें पहले से सांस संबंधी बीमारी हो या कोई एलर्जी हो।

पीएम 2.5 से खतरनाक पीएम-1

चिकित्सक मानते हैं कि कण जितना महीन होगा, नुकसान उतना ज्यादा होगा। पीएम 2.5 मनुष्य के फेफड़ों तक पहुंच सकता है जबकि पीएम-1 रक्त के जरिए शरीर में प्रवेश कर सकता है। पीएम-1 के प्राथमिक स्रोत वाहन और औद्योगिक उत्सर्जन हैं। पीएम-1 प्राणवायु से ऑक्सीजन लेकर खून तक पहुंचाने वाली नलिकाओं से होकर शरीर में फैलते हैं। डीएनए तक पहुंच कर उन्हें प्रभावित करने लगते हैं। क्रोमोसोम (गुणसूत्र) की प्रकृति बदलने लगती है, जो फेफड़े में लंग्स फाइब्रोसिस से लेकर कैंसर की वजह बनती है। लंबे समय तक प्रदूषण वाले क्षेत्र में रहने या काम करने से डीएनए प्रभावित हो सकता है।

बार-बार बजाया गाड़ी हॉर्न तो लगेगा 10 हजार का जुर्माना, जेल भी जाएंगे

लखनऊ में पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की ओर से ध्वनि प्रदूषण के मानक के आधार पर खरे नहीं उतरने वाले 100 से अधिक वाहनों का चालान किया जा चुका है। राजधानी में बढ़ते ध्वनि प्रदूषण को कम करने के लिए यातायात विभाग ने तेज आवाज वाले हार्न के खिलाफ अभियान शुरू किया गया है। अभियान के तहत शहर को चार जोन में बांटा गया है। साइलेंस जोन में 40 डेसीबल से ज्यादा की आवाज वाले हॉर्न बजाने पर चालान भरना होगा।

एडीसीपी ट्रैफिक पूणेंद्र सिंह ने बताया कि पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के मानकों के आधार पर लखनऊ शहर को 4 जोन में बांटा गया है। सभी जोन के मानक अलग-अलग हैं। इसके तहत मानक से तेज आवाज में हॉर्न बजाने वालों के खिलाफ कार्यवाही की जा रही है। 3 महीने में अब तक 100 वाहनों का चालान किया गया है। ध्वनि प्रदूषण फैलाने वालों के खिलाफ 10000 रुपए का चालान किया जा जा रहा है।

प्राइवेट हार्न से हो रहा नुकसान

एडीसीपी ने बताया कि दो पहिया व चार पहिया वाहनों में कंपनी से लगकर आए हॉर्न मानकों पर खरे हैं, लेकिन वाहन स्वामी और तेज आवाज के लिए अलग से हॉर्न लगवा लेते हैं। बाजार से लगवाए हॉर्न की आवाज निर्धारित मानकों से कहीं अधिक है। ऐसे वाहन स्वामियों के खिलाफ चालान की कार्यवाही की जा रही है।

शहर को चार जोनों में बांटा गया
साइलेंस जोन- मानक ध्वनि- 40 डेसिबल
रेजिडेंशियल जोन- मानक ध्वनि- 50 डेसीबल
कॉमर्शियल जोन- मानक ध्वनि- 65 डेसीबल
इंडस्ट्रियल जोन- मानक ध्वनि- 75 डेसीबल

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