मथुरा में मंदिर में नमाज : क्या है खुदाई खिदमदगार और कौन हैं फ़ैसल खान


मथुरा के नंदबाबा मंदिर (Nand Baba Mandir Namaz) परिसर में नमाज पढऩे के जुर्म में गिरफ्तार फ़ैसल ख़ान (Faisal Khan) और उनकी संस्था ख़ुदाई खिदमतगार (Khudai Khidmatgar) इन दिनों मीडिया की सुर्खियों में हैं। फैसल ख़ान को दिल्ली से गिरफ्तार कर मथुरा कोर्ट में पेश किया गया।

पत्रिका न्यूज नेटवर्क

लखनऊ. मथुरा के नंदबाबा मंदिर (Nand Baba Mandir Namaz) परिसर में नमाज पढऩे के जुर्म में गिरफ्तार फ़ैसल ख़ान और उनकी संस्था ख़ुदाई खिदमतगार इन दिनों मीडिया की सुर्खियों में हैं। फैसल ख़ान को दिल्ली से गिरफ्तार कर मथुरा कोर्ट में पेश किया गया। इसके बाद 14 दिन के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। पुलिस को फैसल के तीन और साथियों की तलाश है। इन सभी पर आईपीसी की धारा 153, 295 और 505 के तहत एफ़आईआर दर्ज है। इन चारों के अलावा एफआईआर में ख़ुदाई खिदमतगार (Khudai Khidmatgar) संस्था का जिक्र है। पुलिस को आशंका है कि विदेशी फंडिग से यह कृत्य किया गया। आइए जानते हैं कौन हैं फैसल खान (Faisal Khan) और क्या काम करती है उनकी संस्था ख़ुदाई खिदमतगार (Khudai Khidmatgar)

फ़ैसल ख़ान (Faisal Khan) और चांद मुहम्मद ने 29 अक्तूबर को मथुरा के नंदबाबा मंदिर (Mathura Mandir Namaz) परिसर में नमाज़ पढ़ी थी। उस समय उनके दो अन्य साथी नीलेश गुप्ता और आलोक रतन भी वहां थे। बताया जाता है कि नमाज पढऩे से पहले इन चारों ने ब्रज की चौरासी कोसी परिक्रमा की थी। फ़ैसल ख़ान ख़ुद को हिंदू-मुस्लिम धर्मों में समन्वय रखने वाला बता बताते हैं। 48 वर्षीय फ़ैसल फर्रुख़ाबाद के क़ायमगंज के रहने वाले हैं। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से पढ़ाई के बाद यह दिल्ली के जामियानगर इलाके में रहते हैं। ख़ुदाई खिदमतगार के जरिए यह समाजसेवा करने का दावा करते हैं। यह संस्था दिल्ली की में पंजीकृत एक एनजीओ है जो शांति, भाईचारा और सांप्रदायिक सौहार्द के लिए काम करती है। 2011 में संस्था का गठन हुआ था। दावा है कि संस्था का गठन स्वतंत्रता आंदोलन के गांधीवादी नेता ख़ान अब्दुल गफ्फ़़ार ख़ान की प्रेरणा से किया गया।

मथुरा में मंदिर में नमाज : क्या है खुदाई खिदमदगार और कौन हैं फ़ैसल खान

गौरतलब है कि अब्दुल गफ्फार ने भी ख़ुदाई खिदमतगार संस्था का गठन किया था। बताया जाता है कि इस संस्था से देश भर में कऱीब 70 सक्रिय सदस्य हैं। फैजल का दावा है कि संस्था गफ्फार मंजिल में ‘सबका घर’ नाम से एक संस्था भी चलाती है जिसमें सभी धर्मों के लोग एक साथ रहते हैं। और मिलजुलकर त्योहार मनाते हैं। फ़ैसल का रिकार्ड खंगालने पर पता चलता है कि इन्होंने पाकिस्तान की भी कई यात्राएं की हैं। हालांकि इनका कहना है कि यह यात्राएं सांप्रदायिक सद्भावना के तहत की गयी थीं। फ़ैसल ख़ान इसके पहले अयोध्या में सरयू आरती करके भी चर्चा में आए थे। 2018 में इन्हें संत मुरारी बापू ने सद्भावना पर्व पर पुरस्कार भी दिया। फ़ैसल ख़ान अयोध्या में दोराही कुआं स्थित सर्व धर्म सद्भाव केन्द्र के न्यासी भी हैं। इनके ऊपर इसके पहले भी धारा 144 के उल्लंघन जैसे मामलों में केस दर्ज हो चुके हैं।






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