मुनि देवसिद्ध विजय की तपस्या का पारणा हुआ


46 उपवास की दीर्घ तपस्या

बेंगलूरु. वासुपूज्यस्वामी जैन श्वेताम्बर मूर्तिपूजक संघ में गुरुवार को छह छह आचार्य भगवंतों की उपस्थिति में मुनि देवसिद्धविजय की 46 उपवास की दीर्घ तपस्या का पारणा हुआ। आचार्य कुंदकुंदसूरीश्व, आचार्य देवेन्द्रसागर सूरीश्वर,आचार्य अजीतशेखरसूरीश्वर, आचार्य हीरचन्द्र सूरीश्वर, आचार्य महेन्द्रसागर सूरीश्वर, आचार्य उयप्रभसूरीश्वर की निश्रा में तपस्या अनुमोदना का यह आयोजन किया गया। जनसभा को संबोधित करते हुए पूज्य आचार्य हीरचन्द्रसूरीश्वर ने कहा कि व्यक्ति जन्म से नहीं कर्म से जैन होता है। इनकी यह दीर्घ तपश्चर्या प्रतीक है इस बात की कि व्यक्ति सामान्य से असामान्य भी बन सकता है। पारणा के लाभार्थी साकरिया परिवार ने मुनि भगवंत को पारणा करवाया। मूल दावनगेरे के निवासी जन्म से नायडू परिवार के देवसिद्धविजय के परिजनों का पाद प्रक्षालन कर उनका बहुमान किया गया। संघ के उपाध्यक्ष तेजराज कुहाड़ ने बताया कि अक्कीपेट में ऐसी दीर्घ तपश्चर्या प्रथम बार हुई है। इस अवसर पर संघ के ट्रस्टी उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन ललित कुमार जैन ने किया।



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