हेल्थ सेमिनार: वरिष्ठ न्यूरोलॉजिस्ट ने बताया- शरीर में झुनझुनाहट, आंखों से डबल दिखना हो सकती है मल्टीपल स्क्लेरोसिस की बीमारी 15

हेल्थ सेमिनार: वरिष्ठ न्यूरोलॉजिस्ट ने बताया- शरीर में झुनझुनाहट, आंखों से डबल दिखना हो सकती है मल्टीपल स्क्लेरोसिस की बीमारी

हेल्थ सेमिनार: वरिष्ठ न्यूरोलॉजिस्ट ने बताया- शरीर में झुनझुनाहट, आंखों से डबल दिखना हो सकती है मल्टीपल स्क्लेरोसिस की बीमारी 16


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फरीदाबाद7 घंटे पहले

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वरिष्ठ न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. गुप्ता ने बताया कि मल्टीपल स्क्लेरोसिस बीमारी को लेकर लोगों को जागरुक करने की आवश्यकता है। - Dainik Bhaskar

वरिष्ठ न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. गुप्ता ने बताया कि मल्टीपल स्क्लेरोसिस बीमारी को लेकर लोगों को जागरुक करने की आवश्यकता है।

शरीर में कमजोरी या सुन्नता महसूस हो रहा है या देखने की क्षमता में कमी आ रही है। कोई भी चीज दो-दो दिख रही हैं। पूरे शरीर में झुनझुनाहट जैसा महसूस हो रहा हो तो आप मल्टीपल स्क्लेरोसिस बीमारी से ग्रसित हो सकते हैं। यह जानकारी वरिष्ठ न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. रोहित गुप्ता ने सेमिनार में दी। उन्होंने कहा कि मल्टीपल स्क्लेरोसिस बीमारी एक लाख में से करीब 28 लोगों में पाई जाती है। अब यह संख्या काफी बढ़ रही है। 18 वर्ष के बाद युवा इस बीमारी से ज्यादा प्रभावित होते हैं। खासकर महिलाओं में यह समस्या अधिक देखने को मिलती है।

बीमारी को लेकर लोगों को जागरुक करना जरूरी
वरिष्ठ न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. गुप्ता ने बताया कि यह एक ऑटोइम्यून डिजीज है। यह सेंट्रल नर्वस सिस्टम यानी मस्तिष्क को प्रभावित करती है। शरीर एक विशेष क्रियाविधि से अपनी ही कोशिकाओं और ऊतकों पर हमला करती है। इस प्रतिक्रिया के परिणाम स्वरूप तंत्रिकाओं के ऊपर जो विशिष्ट रक्षात्मक सतह होती है। वह धीरे-धीरे नष्ट होने लगती है। इस बीमारी को जड़ से खत्म करने का अभी तक कोई इलाज नहीं है। किसी व्यक्ति को यदि आंखों से दो-दो दिखाई दे, जोड़ों में समस्या, लकवा या शरीर के किसी हिस्से में अचानक झुनझुनी हो, यदि विकार स्पाइनल कॉर्ड यानी मेरुरज्जु में हो तो दोनों पैरों में लकवा, पेशाब में कठिनाई होना जैसी समस्याएं आना सामान्य है। लक्षण को पहचान कर अगर मरीज का समय इलाज शुरू किया जाए तो वह सामान्य जिंदगी जी सकते हैं।

यह बीमारी पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में ज्यादा
पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में ज्यादा यह बीमारी पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में तीन गुना ज्यादा होती है। वहीं 20 से 50 वर्ष के लोगों में बीमारी की संभावना ज्यादा रहती है। उन्होंने बताया वे हर महीने 4-5 मरीज इस बीमारी के देख रहे हैं। यह बीमारी मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी (केंद्रीय तंत्र) की एक संभावित बीमारी है। लोगों में कई तरह की भ्रांतियां हैं कि इसका कोई इलाज नहीं है। ऐसा नहीं है, कुछ दवाइयों और इंजेक्शन की मदद से इसका इलाज पूरी तरह से संभव है। लेकिन इसमें थोड़ा समय लगता है।

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