100 की उम्र में कर्नाटक की इन तीन महिलाओं ने दी कोरोना को मात


  • चित्रदुर्ग जिला सर्जन डॉ. एच. बसवराजू ने कहा कि तीनों महिलाओं ने साबित किया है कि किसी भी तरह की समस्या का सामना करने के लिए सकारात्मक सोच जरूरी है। तीनों महिलाएं दूसरों के लिए मिसाल बनी हैं।

बेंगलूरु. जीवन के 100 वर्ष से ज्यादा देख चुकी राज्य की तीन महिलाओं (three women above 100 years win over corona in Chitradurga district of Karnataka) ने कोरोना से जिंदगी की जंग जीती है। तीनों चित्रदुर्ग से हैं। अस्पताल से घर लौटने के बाद तीनों स्वस्थ जिंदगी बिता रही हैं।

105 वर्षीय चितिरम्मा को कोविड पॉजिटिव होने के बाद 28 सितंबर को अस्पताल में भर्ती किया गया। कोविड रिपोर्ट निगेटिव आने पर एक अक्टूबर को उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिली। चितिरम्मा को पहले से और कोई बीमारी नहीं है। यही वजह है कि इस उम्र में भी वे कोरोना से उबरने में सफल रहीं।

चित्रदुर्ग की ही 110 वर्षीय सिद्धम्मा कोरोना को मात दे चुकी हैं। सिद्धम्मा के पांच बच्चे, 17 पोते और 22 पड़पोते हैं। परिवार के अन्य सदस्यों के साथ सिद्धम्मा के भी 27 जुलाई को कोरोना वायरस से संक्रमित होने की पुष्टि हुई थी। वे पुलिसकर्मी की मां हैं और पुलिस आवास में रहती हैं। भर्ती होने के पांच दिन बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिली थी। सिद्धम्मा को भी पहले से कोई बीमारी नहीं है। उम्र के इस पड़ाव में भी मधुमेह या उच्च रक्तचाप उनके आसपास भी नहीं फटका।

100 वर्ष की उम्र में गोविंदम्मा ने भी सिद्ध कर दिखाया कि उम्र महज एक पड़ाव है। बेटे, बहु और पोते के साथ 25 जून को उनमें भी कोरोना वायरस संक्रमण की पुष्टि हुई थी। रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद सभी को छह जुलाई को अस्पताल से छुट्टी मिली थी। पोते गोवर्धन के अनुसार गोविंदम्मा ने कभी भी जंक फूड का सेवन नहीं किया। रागी मुद्दे और रागी से बनी रोटी उनका मुख्य आहार रहा है।

 









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